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अब हमारी बारी है

Posted On: 22 Jan, 2013 Others में

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मुझे अच्छी तरह याद है अपने बचपने में….गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस हमारी तैयारियां महीने भर से शुरु रहती थी,देशभक्ति गाने-नाटकों के मंचन की जोरशोर से तैयारी,और फिर उस दिन सुबह सुबह फुल तोङकर लाते,नहा धोकर ,साफ सुथरे कपङे पहन कर विद्धालय की ओर रवाना होते,मैदान में जमा होकर पंचम सुर में ,प्रधानाध्यापक के झंडा फहराते ही जयघोष करते ,जिससे पुरा ईलाका गुंजायमान हो जाता,तिरंगे को सलामी देने के बाद शुरु होता बालमन का एक चिरप्रतिक्षित क्षण जलेबी पाने का….,शाम तक विद्धालय प्रांगण में उछलकूद,फिर समापन….., और फिर अगले साल की प्रतिक्षा..उसके बाद महाविद्धालय..फिर गृहस्थ जीवन आते आते वो जोश और उत्साह तो कम हो गया पर देशभक्ति का जो बीजारोपण बचपने में हो गया था,उसकी जङें ढीली ना पङी..यही कारण है कि भले अब झंडोत्तोलन में शामिल हो पाना संभव नही होता,सुबह टीवी पर झंडोत्तोलन देखना नहीं भूलती,विद्धालय की कतार ना रही,पर पास के हलवाई की दुकान पर हमारी बुकिंग दो दिन पहले हो जाया करती है,मुंह से जोर का जयघोष भले ना निकलता हो,दिल उछल उछल कर भारत माता की जय जरुर बोलता है,कुल मिलाकर परिस्थितियां तो बिल्कुल बदल गई पर दिल,मन,भावना और श्रद्धा यथावत रहीं और दुआ है कि अंतिम सांस तक रहे,,,
पर अब प्रश्न ये है कि हमारे बाद ये भावनाएं कितने दिनों तक सांस ले पाएंगी….आज की पीढी जो त्वरित परिणाम चाहती है,जो आज में जीने में यकीन रखती है और ज्यादा सोचने समझने में समय नहीं गंवाती…..वो आजादी के सतत प्रयासों,अपने स्वर्णिम अतीत और उन संघर्षों को क्या समझेगी जिसने उन्हं आज सिर्फ अपने बारे में सोच पाने की स्वतंत्रता दी है,मेरे पिताजी कहते है कि दादाजी की उम्र कोई सत्रह-अठरह साल की रही होगी स्वतंत्रता संग्राम के वक्त,उनके हट्ठे-कट्ठे शरीर को देख कई दफा फिरंगी मुलाजिमों ने उन्हे अपनी सेवा स्वीकारने का मुलम्मा दिया पर वो ना डिगे…क्या आज का युवा ये माद्दा रखता है..और तो और आज सेना में भर्ती के लिए जो युवा शामिल होते है उनमें से नब्बे प्रतिशत की मंशा रोजगार पानी होती है ना कि देश की सेवा..आए दिन प्रतिभाओं का विदेश पलायन,क्या देश के साथ अन्याय नहीं,एन आर आई का संबोधन हमारे लिए गर्व का विषय भले हो पर क्या ये अपनी धरती का अपमान नही…..,गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस हम बङों के लिए खुशियां तो लाता है पर सार्वजनिक अवकाश पाने की खुशी..जिसे हम एक-दुसरे से मिलकर बजाय मुबारकबाद देने के घर मे दुबक कर,दिन बीता देने में यकीन रखते है…..तो भला ये पीढी हमसे सीखे भी तो क्या,अपने पिता को राष्ट्रगाण के सम्मान में खङा होते देखकर ही तो मैनें भी उसे अपने जीवन में उतारने की कोशिश की,अपने दादाजी के किस्से सुनकर ही तो मेरे भाई ने सेना में डाक्टर बनने को प्राथमिकता दी…. जब हमारी ही भावनाएं लुंजपुंज होगी तो हम अपने भविष्य को देश का भविष्य भला कैसे बनाएंगे,आज हमारे बच्चों के लक्ष्य में ना जाने कौन कौन से क्षेत्र शामिल है,पर कोई ये नही कहेगा मैं बङा होकर देश की सेवा करना चाहता हुं,कैसे कहे…. हमने सिखाया ही नहीं.तो कहां से लाएंगे हम अपने देश के रक्षक……वो रणबांकुरे जिन्हे धरती अपने प्यारे बेटों का नाम देती है उन्हे तो पाठ्य-पुस्तिकाएं आतंकवादी करार देती है तो भला कैसे जागेगी अपने नौनिहालों के मन में देशभक्ति,पिछले वर्ष हमारे शहर के एक जाने माने स्कुल के आगे अभिभावकों ने इसलिए धरना दिया की स्वतंत्रता दिवस के नाम पर चंदा उगाही की गई ,पर बच्चों को एक टॉफी भी नहीं दी गई …….क्या ऐसे धरने उन पाठ्य पुस्तकों को हटाने के लिए नही होने चाहिए थे… आज के बच्चों के लिए तो ये दिन इतना ही मायने रखते है कि, बस फ्लैग-होस्टिंग और फिर छुट्टी कैसे आएगी हमारे बच्चों के मनों में जिम्मेदारी की भावना,वो विश्वास पात्रता,मर मिटने का जज्बा,कैसे दिल चीर कर रख देने वाले देशभक्ति गानों पर उनकी भुजाएं फङकेंगी,रोंगटे खङे होगें…….,तभी जब हम चाहेंगे…हमें इन दिनों को विशिष्ट रुप देना होगा,होली दीवाली,ईद,क्रिसमस की तरह खुशियों का पर्व बनाना होगा,मिठाईयां खाकर- खिलाकर ,दिए जलाकर इन विशेष दिनों की खुशी का उसे एहसास दिलाना होगा,अपने स्वतंत्रता संग्राम की वीर गाथाओं से उसका परिचय कराना होगा,अपनी आजादी के महत्व और मूल्यों और उसे बरकरार रखने की ताकत और जज़्बे को उसके दिलो-दिमाग में बिठाना होगा..ताकि फिर उसे इनका इंतजार रहे, वो मन से इन पर्वों में शामिल हों,अपनी आजादी के लिए अपने शहीदों-महापुरूषों के प्रति उसके अंदर सम्मान हो….बस एक बार उन्हे इसकी महत्ता समझ आगई तो फिर ये धरती उन्हें अपने मोहपाश से मुक्त होने ही नही देगी पर एक प्रयास जरुरी है, हमने अपने माता पिता से सीखा ,हमारे बच्चे हमसे सीखे तभी तो हमारा कर्तव्य पुरा होगा अभिभावक के रुप में भी और इस देश के एक सजग नागरिक के रूप में भी,तो हमेशा की तरह यही कहुंगी शुरूआत अपने ही घरों से करें……..,चलते चलते आने वाले गणतंत्र दिवस की सबको हार्दिक बधाईयां…भारत माता की जय.

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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
February 27, 2013

समकालीन लेखन समाज को दिशा देता है १ आपका लेख इसी श्रणी का है १

Sushma Gupta के द्वारा
February 11, 2013

प्रिय मीनू जी, कुछ अस्वस्थ्यता एवं अन्य कारणोंवश आपके इस सुन्दर संदेशप्रद आलेख की सहमतिपूर्ण प्रतिक्रया मैं समयानुसार नहीं दे सकी , इस हेतु खेद है ,आने बाले भावी बच्चों की पीडी के लिए आपके विचार सटीक व् सार्थक सन्देश दे रहें हैं एवं आजके बच्चों व् युवा पीडी का मार्ग दर्शन कर रहें हैं,इसके लिए आपका हार्दिक आभार एवं वधाई…

aman kumar के द्वारा
January 29, 2013

देशभक्ति का जज्बा, नई पीढ़ी में अब दिखाई नहीं देता| सही कहा आपने. जागरूक करने वाली इस सुंदर और सार्थक पोस्ट पर हार्दिक बधाई !1.

shashibhushan1959 के द्वारा
January 24, 2013

आदरणीय मीनू जी, सादर ! इस रचना में आपकी प्रखरता देख मन भावाभिभूत हो गया ! आपकी सोच को नमन ! बिलकुल सही बात है कि हम सभी को अपने परिवार में राजनीति की नहीं – नेताओं की नहीं – पर देश भक्ति की भावना जरुर जीवित रखनी चाहिए ! हम सभी को ऐसे-ऐसे तौर-तरीकों के बारे में विचार रखने चाहियें और प्रयास होना चाहिए कि इन विचारों को कारगर रूप से प्रसारित भी किया जाय ! स्कूली जीवन की याद दिलाने के लिए आभार ! सादर !

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    आदरणीय शशि जी एक लंबे अरसे के बाद आपकी प्रतिक्रिया पाकर मुझे भी बहुत खुशी हुई,आपने विचारों को सराहा लिखना सार्थक  रहा,आभार आपका

yogi sarswat के द्वारा
January 24, 2013

आदरणीय मीनू जी , सादर नमस्कार ! आपने गणतंत्र दिवस के अवसर पर ये लेख लिखा है ! हम आज़ाद देश के गुलाम नागरिक आपको भी शुभकामनाएं देते हैं ! बिलकुल सही सोच है आपकी हम देश के स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को महज एक छुट्टी कि तरह ही लेते हैं. इसके पीछे बड़ा कारण है कि ना तो हमारे नेता चाहते हैं कि कोई ऐसा कार्यक्रम हो जो उनको बहुत लंबे समय तक रोके रखे क्योंकि सभी तो व्यापारी हैं और ना ही हम चाहते हैं कि नेताओं कि बकवास सुने. इस कारण से ही बच्चे भी इसके महत्त्व को नही जान पा रहे हैं. अवश्य ही हमें इस गणतंत्र दिवस से ही इसे कुछ इस तरह मनाने कि कोशिश करना चाहिए कि जों बच्चों को इसके महत्त्व को समझा सके. सुन्दर आलेख. वंदे मातरम.

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    योगी जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
January 24, 2013

आपके विचारों के साथ मेरी पूर्ण सहमति है मीनू जी गणतंत्र दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं वन्देमातरम

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    आदरणीय अलका जी ,सहमति के लिए आपका ह्रदय से आभार

January 23, 2013

सही कहा आपने मीनू जी बच्चे बड़ों का अनुकरण कर ही आगे बढ़ते हैं , सुंदर लेखन

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    सुधीर जी,आप ब्लॉग पर पधारे व प्रतिक्रिया देकर सराहा,आपका बहुत बहुत धन्यवाद

yatindranathchaturvedi के द्वारा
January 23, 2013

सही बात

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    धन्यवाद आपका,पर शब्दों के मंच पर ये कंजूसी क्यों……(क्षमा सहित)

akraktale के द्वारा
January 23, 2013

मीनू जी सादर, बिलकुल सही सोच है आपकी हम देश के स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को महज एक छुट्टी कि तरह ही लेते हैं. इसके पीछे बड़ा कारण है कि ना तो हमारे नेता चाहते हैं कि कोई ऐसा कार्यक्रम हो जो उनको बहुत लंबे समय तक रोके रखे क्योंकि सभी तो व्यापारी हैं और ना ही हम चाहते हैं कि नेताओं कि बकवास सुने. इस कारण से ही बच्चे भी इसके महत्त्व को नही जान पा रहे हैं. अवश्य ही हमें इस गणतंत्र दिवस से ही इसे कुछ इस तरह मनाने कि कोशिश करना चाहिए कि जों बच्चों को इसके महत्त्व को समझा सके. सुन्दर आलेख. वंदे मातरम.

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    आलेख के सार को समझने और सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार रक्ताले जी

seemakanwal के द्वारा
January 23, 2013

हमें भी अपने बचपन के दिन याद आ गये . गणतन्त्र दिवस की अग्रिम शुभकामना .

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    सीमा जी,पोस्ट का आधा मकसद पुरा हुआ धन्यवाद व शुभकामनाएं

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    प्रथम प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद व स्वागत ब्लॉग पर 

vinitashukla के द्वारा
January 22, 2013

देशभक्ति का पुराना जज्बा, नई पीढ़ी में अब दिखाई नहीं देता- सही कहा आपने. जागरूक करने वाली इस सुंदर और सार्थक पोस्ट पर हार्दिक साधुवाद.

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    आपकी सराहना के लिए हार्दिक आभार विनीता जी

jlsingh के द्वारा
January 22, 2013

हमने अपने माता पिता से सीखा ,हमारे बच्चे हमसे सीखे तभी तो हमारा कर्तव्य पुरा होगा अभिभावक के रुप में भी और इस देश के एक सजग नागरिक के रूप में भी,तो हमेशा की तरह यही कहुंगी शुरूआत अपने ही घरों से करें……..,चलते चलते आने वाले गणतंत्र दिवस की सबको हार्दिक बधाईयां…भारत माता की जय. एक बार पुन: बोलता हूँ, भारत माता की जय!, वन्दे मातरम! जय हिन्द! ये लीजिये मुझे भी जिलेबियों की याद आने लगी! मेरे मुंह में पानी भी आ गया! आदरणीया मीनू जी, सादर अभिवादन! आपकी हर बात सोचने पर मजबूर करती है!

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    जलेबियों का दिन आ ही गया है,खुद भी खाएं और हमें भी खिलाएं, आपने सोचा ,बहुत बहुत धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 22, 2013

आपके विचारों से पूरी तरह सहमत स्नेही मीनू जी . सादर वन्दे मातरम्

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    सादर धन्यवाद चाचा जी

nishamittal के द्वारा
January 22, 2013

अब तो ये भी एक औपचरिकता भर रह गया है,मीनू जी.आपने उस समय की याद दिला दी जब एक जोश के साथ जाते थे ,अधिकार के साथ कर्तव्यों का पालन करना ही देश को आगे ले जा सकता है.

    minujha के द्वारा
    January 25, 2013

    प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार


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