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सिखा गई ज़िंदगी

Posted On: 3 Dec, 2012 Others में

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आज कई महीनों के बाद हाथों में कलम आई तो कितनी बातें,कितने जज़्बात और जाने कितनी भावनाएं अपनी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को कसमसा उठीं,इस मंच के जितने भी भाई-बहनें मुझसे परिचित है अवश्य एक जिज्ञासा व्यक्त करेंगे कि मैं कहां गुम थी इतने दिनों…..तो ज्यादा ना कह यही कहुंगी कि एक ख्वाब की तामिलगी में लगी थी ,पर दुर्भाग्यवश उपलब्धि हाथों में आते आते रह गई..और मेरी चिरअभिलाषा अपनी मंजिल से कुछ और दुर खिसक गई……पर मैं अगले वर्ष के लिए अवश्य आशान्वित रहुंगी..आज नही तो कल ,कल नहीं तो परसों…..जब तक जिंदगी है शायद तब तक…
इन दिनों आप सबों को बहुत याद किया ,पर समयाभाव के कारण जुङ ना पाई,फिर असफलता ने घेर लिया, उससे बाहर आते ही वापस आप सबके करीब आकर अपना मन खोलने का जी किया तो हाज़िर हो गई, सबसे पहले आप सबों को मेरा हार्दिक नमन……………आगे अपने बुरे वक्त में मैनें कई बातों का गहन अध्ययन किया और कई बातें सीखी, मैने पढा था कभी-दिशा,समर्पण, ढृढ निश्चय,अनुशासन व निश्चित समय यही पांचों तत्व लक्ष्य की सफलता-असफलता निर्धारित करते है,मैने इन पांचों को निभाया पर ना जीत पाई…..,फिर कारण-उद्देश्य की भी गणना की ,पर वहां भी अपनी असफलता के कारण-उद्देश्य को तलाशने में विफल रही………,उसके बाद अपने आप को परखने की कोशिश की –क्या मैने आज तक किसी का बुरा किया या चाहा है? तो जवाब नकारात्मक ही पाया..,फिर अपने आचरण का अंतरविश्लेषण किया कि कही मैं निष्ठुर,अवसरवादी,अहंकारी या दूसरों के दुख या हार पर खुश होने वाली इंसान तो नहीं?….तो अपने अंदर ये विसंगतियां भी मुझे दृष्टिगोचर नही होती….फिर मेरे साथ ही ऐसा क्यों?? ……….अपने इन्ही सवालों का जवाब ढूंढने में अपने कई दिनरात गंवाने के बाद यूंहि बेखेयाली में मुझे अपने पुस्तक कक्ष में जीत आपकी दिखी….बेमन से पन्ने पलटते पलटते एक पन्ने पर मेरी नजरें स्थिर हो गई ,जहां ये लिखा था कि अंग्रेजी में एक कहावत है “ एक शांत समुद्र में एक नाविक कभी कुशल नहीं बन पाता.” और इसी एक पंक्ति ने मुझमें इतना साहस भरा कि ना केवल मैं उठ पाई बल्कि फिर प्रयास कर पाने की ऊर्जा भी पाई…क्या आपको नहीं लगता कि इस पंक्ति में जीवन के सभी संघर्षों के पीछे छिपे उद्देश्यों का सार है…मैने इस बात को महसूस किया कि दुख में मिला साहस और भरोसा ना केवल आपको दुख से उबारता है बल्कि आपके जज़्बे को दुगना कर देता है और इसी सीख को मैने पुरे घटनाक्रम का सबक समझ आत्मसात किया
आज मैं अपनी हार से पूर्णतः बाहर आ चुंकी हुं और मुझे यह भी यकीन है कल की जीत मेरी ही है,अवश्य ही हर किसी के जीवन में ये वक्त आता है, उस समय यही याद रखना चाहिए कि असफलता यही दर्शाती है कि सफलता का प्रयास पुरे मन से नही किया गया,अगर लक्ष्य को पाना है तो उसमें अपना सर्वस्व झोंक कर उस छटपटाहट को पैदा कीजिए,जिससे आपकी सांसों के तार जुङे हों,यकीन मानिए सफलता सबसे पहले आपको आकर गले लगाएगी….उम्र के इस पङाव पर आकर जिंदगी नें मुझे जो कुछ सिखाया या कहें मैनें जो कुछ जिंदगी से सीखा उसे आपसे बांटकर असीम संतोष का अनुभव कर रही हुं,और असफलताओं के बोझ से कल तक लदा मेरा मन आज फूलों से भी हल्का हो चला है… पहले तो ये कामना करूंगी कि जीवन में दुख आए ही नही,अगर आए भी तो शीघ्रातिशीघ्र हमारी क्षमता के आगे घुटने टेक हमें अपने जाल से मुक्त करे ……अब निरंतर आप सबों के संपर्क में बने रहने की शुभेच्छा लिए हुए विदा चाहुंगी….

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38 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
December 21, 2012

dear meenoo u love and focus on ur ambition one day the love and desire 4 ur ambition will b in ur fist. all d best

    minujha के द्वारा
    December 23, 2012

    thanks a lot for your good wishes, thank you very much

December 16, 2012

सादर प्रणाम दी, असफलता यही दर्शाती है कि सफलता का प्रयास पुरे मन से नही किया गया,अगर लक्ष्य को पाना है तो उसमें अपना सर्वस्व झोंक कर उस छटपटाहट को पैदा कीजिए,जिससे आपकी सांसों के तार जुङे हों,यकीन मानिए सफलता सबसे पहले आपको आकर गले लगाएगी…………………………….हार्दिक आभार……………….सुन्दर और शास्वत पक्तियों के लिए…………………

    minujha के द्वारा
    December 19, 2012

     धन्यवाद भाई,आपने सराहा और समझा आपका आभार

seemakanwal के द्वारा
December 15, 2012

मीनुजी प्रेरक लेख .किसी शायर ने कहा है “सुर्खुरू होता है इन्सां ठोकरें खाने के बाद “

    minujha के द्वारा
    December 19, 2012

    सच कहा आपने सीमा जी,धन्यवाद समय देने और ब्लॉग पर पधारने के लिए.

alkargupta1 के द्वारा
December 13, 2012

मीनू जी, यह ज़िन्दगीसुख-दुःख का ऐसा ताना बना है जिसमें उलझते और सुलझते रहते हैं और जीवन पर्यंत हम कुछ न कुछ सीखते रहते हैं…… उत्तम आलेख के लिए बधाई

    minujha के द्वारा
    December 15, 2012

    आदरणीय अलका जी सादर धन्यवाद व आभार आपका.

sudhajaiswal के द्वारा
December 12, 2012

मीनू जी, नमस्ते, बहुत अच्छा आलेख लिखा है, जन्दगी की यही रीत है हर के बाद ही जीत है| बहुत बधाई|

    minujha के द्वारा
    December 15, 2012

    धन्यवाद सुधा जी व स्वागत आपका ब्लॉग पर.

omdikshit के द्वारा
December 11, 2012

मीनू जी ,नमस्कार. दुःख के बाद सुख का और असफलता के बाद सफलता का आनंद ज्यादा अच्छा लगता है…’हम होंगे कामयाब….एक दिन’… का स्मरण सबसे सुखदायी होता.मैं तो यही फार्मूला अपनाता हूँ. आप का पुनरागमन अच्छा लगा.

    minujha के द्वारा
    December 12, 2012

    बिल्कुल सही बात कह दी आपने ओम जी,इस सुत्र का स्मरण ही सुखदायी है,हार्दिक आभार

vinitashukla के द्वारा
December 11, 2012

बहुत दिनों बाद मंच पर आपका पुनरागमन सुखद लगा मीनू जी. आशा है कि इसी सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आपकी रचनाएँ उत्तरोत्तर पढने को मिलती रहेंगी. शुभकामनाएं.

    minujha के द्वारा
    December 12, 2012

    आभार आपका विनीता जी.

Sushma Gupta के द्वारा
December 9, 2012

प्रिय मीनू जी,जीवन के हर पल मनुष्य कुछ सीख पाता है,सबसे अधिक विपत्ति में सीख-भरे अनेको अनुभव होते है, जिनसे भी जिन्दगी स्वत: ही बहुत कुछ सिखला देती है ,अब अतीत को भुलाकर विकास के पथ पर बढने की कामना के साथ …

    minujha के द्वारा
    December 10, 2012

    आदरणीय सुषमा जी नमस्कार आपने प्रिय का संबोधन दिया जो बहुत अच्छा लगा,सच कहा आपने आगे बढने के लिए अतीत को भुलाना ही पङता है ,बहुत कुछ भुला चुंकी हुं,शेष भुलाने में लगी हुं….,आपका हार्दिक आभार 

Santosh Kumar के द्वारा
December 8, 2012

आदरणीया ,..सादर प्रणाम बहुत दिनों बाद आपकी सकारात्मक पोस्ट पढ़कर मन आनंदित हुआ ,..मन के हारे हार है ,.मन के जीते .. दुख में मिला साहस और भरोसा ना केवल आपको दुख से उबारता है बल्कि आपके जज़्बे को दुगना कर देता है ….अत्यंत प्रेरक पोस्ट के लिए सादर अभिनन्दन

    minujha के द्वारा
    December 10, 2012

    संतोष भाई नमस्कार  पहली बात तो आपको देखकर खुशी हुई,दूसरी बात आपने सराहकर जो बल दिया वो आगे भी मेरे काम आएगी,आदर सहित आभार आपका

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 7, 2012

प्रिय भतीजी, सस्नेह चलना ही जिन्दगी है. सफलता जारूर मिलेगी. शुभ कामनाएं

    minujha के द्वारा
    December 7, 2012

    सादर प्रणाम चाचाजी आपके प्यार के लिए धन्यवाद

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
December 6, 2012

मीनू झा जी, सादर अभिवादन !……. काफी दिनों बाद मंच पर आप की उपस्थिति ने हर्षातिरेक का अनुभव कराया , अब आगे भी इसी तरह सदैव बनी रहें ! असफलता ही सफलता की जननी है ! हारिये न हिम्मत बिसारिये न हरिनाम ! पुनश्च !

    minujha के द्वारा
    December 7, 2012

    आचार्य जी नमस्कार हार्दिक आभार आपने मनोबल बढाया,मेरी कोशिश जारी रहेगी,धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
December 6, 2012

एक शांत समुद्र में एक नाविक कभी कुशल नहीं बन पाता. आज मैं अपनी हार से पूर्णतः बाहर आ चुंकी हुं और मुझे यह भी यकीन है कल की जीत मेरी ही है,अवश्य ही हर किसी के जीवन में ये वक्त आता है, उस समय यही याद रखना चाहिए कि असफलता यही दर्शाती है कि सफलता का प्रयास पुरे मन से नही किया गया,अगर लक्ष्य को पाना है तो उसमें अपना सर्वस्व झोंक कर उस छटपटाहट को पैदा कीजिए,जिससे आपकी सांसों के तार जुङे हों,यकीन मानिए सफलता सबसे पहले आपको आकर गले लगाएगी….उम्र के इस पङाव पर आकर जिंदगी नें मुझे जो कुछ सिखाया या कहें मैनें जो कुछ जिंदगी से सीखा उसे आपसे बांटकर असीम संतोष का अनुभव कर रही हुं आप इतने दिनों के बाद मंच पर हैं , देखकर अच्छा लगा ! आपने अपनी हिम्मत और अपने उच्च विचारों के बल पर अपनी परेशानियों पर विजय पाई है ! ये न केवल प्रेरणादायक है बल्कि हमें सिखाता भी है ! बहुत सुन्दर

    minujha के द्वारा
    December 6, 2012

    मेरी असफलता को इतना मान देने के लिए आपका शुक्रिया योगी जी अगर ऐसा है तब तो वो असफलता रही ही नहीं,आपका हार्दिक आभार

akraktale के द्वारा
December 5, 2012

मीनू जी सादर स्वागत. जीवन में सफलता पाने के लिए लक्ष्य पर पूर्ण फोकस कर सफलता प्राप्त की जा सकती है यह बेशक सत्य है किन्तु इसका अर्थ ये कदापि नहीं कि बीच में असफलताएं नही आती. आप जिस कार्य में भी सफलता प्राप्त करना चाह रही हैं उस पर असफलता के कारण को जाने पुनः एक रणनीति तैयार करें पुरानी कमियों को दूर करते हुए सफलता अवश्य ही मिलेगी. मेरी शुभकामनाएं है. मगर कुछ वक्त मंच के साथियों को भी दें यह आपकी एकाग्रता को बढाने में सहायक ही होंगे.

    minujha के द्वारा
    December 6, 2012

    आपकी सलाह को आत्मसात करते हुए मैं अपनी कोशिश जारी रखुंगी रक्ताले जी,आत्मबल बढाने के लिए आपका ह्रदय से धन्यवाद

rekhafbd के द्वारा
December 5, 2012

मीनू जी असफलता सफलता की पहली सीढ़ी है ” एक शांत समुद्र में एक नाविक कभी कुशल नहीं बन पाता.” बिलकुल सही है यह ,इंसान सघर्ष कर के ही सीखता है ,आप वापिस इस मंच पर आई ,बहुत अच्छा लगा ,शुभकामनाएं

    minujha के द्वारा
    December 6, 2012

    मुझे भी आप सबों के पास वापस आकर अच्छा लगा रेखा जी,धन्यवाद आपका

manoranjanthakur के द्वारा
December 4, 2012

बहुत स्वागत … बधाई

    minujha के द्वारा
    December 6, 2012

    धन्यवाद मनोरंजन जी

nishamittal के द्वारा
December 4, 2012

मीनू जी,बहुत दिनों के बाद मंच पर आपको पाकर सुखद ल;आगा,किसी भी उद्देश्य को लेकर हम परिश्रम करें और सफलता से वंछित रह जाएँ तो दुःख स्वाभाविक है,परन्तु सब कुछ अपने हाथ में नहीं .आप स्वयं अपना विश्लेषण कर चुकी हैं,आपका दृढ संकल्प आपको विजय श्री का वरण अवश्य कराएगा.हमारी शुभकामनाएं आपकी उत्कृष्ट सफलता के लिए.

    minujha के द्वारा
    December 6, 2012

    आदरणीय निशा जी आपकी शुभकामनाएं व उत्साहवर्धन सर आंखों पर बहुत बहुत धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
December 4, 2012

आदरणीय मीनू जी, सादर अभिवादन! निश्चित ही आपकी अनुपस्थिति खल रही थी. आदरणीय अबोध जी की भी…… गुरुदेव राजकमल तो मंच को अलविदा कह चुके हैं! पुराने जितने भी ब्लोग्गर भाई -बहन हैं, सबकी याद अवश्य आती है! आपके सन्दर्भ में मेरे अग्रज भ्राता का एक वाक्य याद आता है – सफल तैराक तो वो है जो धारा की विपरीत दिशा में तैर कर लक्ष्य को प्राप्त करे! … और विशेष क्या कहूं ….आपका हार्दिक स्वागत और सफल होने के लिए शुभकामना!

    minujha के द्वारा
    December 6, 2012

    इतनी प्रेरणादायी बात कर आपने मेरा मन और हल्का कर दिया जवाहर जी,सादर धन्यवाद

abodhbaalak के द्वारा
December 4, 2012

अब मई क्या लिखूं, मई तो खुद भी इतने दिनों के बाद…., :)

    minujha के द्वारा
    December 6, 2012

    अबोध जी नमस्कार आपका आना ही बङी बात है,आभार सहित धन्यवाद

mayankkumar के द्वारा
December 3, 2012

आपका लेख पढ़ वाकई दिल प्रसन्न हुआ ……. सधन्यवाद ……. आपकी कलम में कोई बात ज़रूर है ….. !!!!! सधन्यवाद !!

    minujha के द्वारा
    December 6, 2012

    घन्यवाद मयंक जी


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