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दिल का बाज़ार सजा है

Posted On: 25 Mar, 2012 Others में

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“खिलौना” एक बच्चे की सबसे बङी जागीर,उसके सपनों की दुनियां,उसका सबसे पहला साथी,यूं तो बङी छोटी सी बात है,हमारा बाज़ार अनेकों खिलौनों से पटा पङा है,आराम से उसकी पसंद का खिलौना उसके हाथ में थमा,कतर्व्य भी निभाया,उसके चेहरे की खुशी भी पाई और उसका मनचाहा दिला पाने का गर्व भी किया,पर जो एक साथ इतनी खुशियां लेकर आया क्या वास्तव में वो खिलौना है……….,या महज उसकी भावनाओं के साथ एक भद्दा सा मजाक,जो कल को उसके ही नही हमारे लिए भी घातक हो सकता है…पर कहां वक्त है हमारे पास ये सब सोचने का ,पर इस सत्य से मुंह मोङकर हम जो कर रहे है उसका अंजाम भी तो हमें ही भुगतना होगा,होली के दिन बच्ची को पिचकारी दिलाने बाजार जाना हुआ था,एक से एक रंग रूप वाली पिचकारियां दुकानों की शोभा बनीं हुईं थी.लोग धङल्ले से खरीदे जा रहे थे कि कही उनके बच्चे की पसंद वाली पिचकारी खतम ना हो जाए,मैने भी बच्ची की पसंद की पिचकारी उठाई पर जैसा पूर्वानुमान था मेड इन चायना ने ऐसे मुंह चिढाया मानो मुझ जैसी बङी मुर्खा से उसका पहली बार सामना हुआ हो,उसे यथास्थान रख मैं लगभग सारे दुकानों में घुम आई,बमुश्किल एक दुकान वाले ने कहीं से एक पुरानी सी दिखने वाली पिचकारी निकाल कर दी और अपने हाथ खङे कर दिए-बस यही है ,बेटी तो वही बांसो उछलने लगी,जाने कितने प्रलोभन दे उसे राजी किया,पता नही कितनी बार ऐसा कर चुकी हुं और आगे कितनी बार करना होगा..,जब दुसरे बच्चो के आकर्षक खिलौने देख कर आती है तो रोती है,;चिल्लाती है हमसे लङती है कि मेरी टोकरी में वैसे खिलौने क्यों नही,कैसे समझाउं उस नन्ही सी जान को, जब बङे तक समझने को तैयार नही,मेरे रिश्तेदार इस बात का मजाक बनाते है ,कहते है अरे तुम्हारे बच्चे के लिए कुछ खरीदने से पहले सौ बार सोचना पङता है कहीं चाइनीज तो नही ,क्या कहुं सबसे की मेरा बच्चा आसमां से उतरा कोई फरिश्ता नही,बस मुझे उसकी फिक्र है,मैं बच्चे के मामले में कोई समझौता करना उसके साथ अन्याय करने के तुल्य समझती हुं,वो भी सेहत सी अमुल्य संपत्ति, जो आगे जाकर उसकी सबसे बङी पुंजी बनने वाली है… कभी भी नही…
क्या मैं गलत हुं,आज जब आप बाज़ार जाएंगे तो सौ में सत्तान्वें खिलोने आपको चीन निर्मित ही मिलेंगे शेष तीन की शक्लो सुरत ऐसी होगी कि आप उसे वापस रखने को विवश हो जाएंगे,चीन से जो खिलौने बनकर भारत आते है उसमें वे सस्ते और घटिया किस्म की प्लास्टिक ही नही ,बल्कि जहरीले रसायन भी इस्तेमाल करते है जो हमारे बच्चे के लिए धीमे जहर का काम करता है—ये बाते हम जाने कितनी बार सुन चुके है,जानते भी है ,समझते भी है पर जाने क्यों जीवन में उतारने से हिचकते है,बहुत बार हमारी सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाने की बात की पर उसे अमलीजामे तक नही पहुंचाया,दूसरी बात हमारे देश में जो खिलौने बनते है वो इन खिलौनों के आगे इतने फीके लगते है कि हमें पसंद नहीं आते तो बच्चे क्या पसंद करेगें भला, मैं जानती हुं कि इस बाज़ार को नकारना बहुत ही मुश्किल है पर क्या दुनियां की कोई भी कमजारी ऐसी है जो आप पर अपने बच्चे के प्यार से ज्यादा हावी हो जाए,हमें इस अंधेरी कोठरी से बाहर आना ही होगा ,इस कृत्रिम भ्रमजाल से निकलना ही होगा जो पल दो पल की खुशी की खातिर हमारा सबकुछ लील सकती है,क्योकि चीन निर्मित ये बाज़ार खिलौनो का नही हमारे मासुमों के छोटे छोटे दिलों का बाजार है जिससे वो इसलिए खेल रहे है क्योंकि हम उन्हे खेलने का मौका दे रहे है एक तो पहले ही वातावरण इतना दूषित हो चुका है कि हम चाहकर भी अपने बच्चों को स्वस्थ हवा नही दे सकते,जो समय उन्हें परियों,राजा-रानियों की कहानियों में गुजारना था वो भ्रष्टाचार,घोटालों,चुनावों को दे रहे है.बच्चे अपना बचपन खो रहे है या फिर देश के भावी कर्णधारों ने समय से पहले अपनी जिम्मेदारियां संभाल ली है,जो कुछ भी है……..पता नही इसे अच्छा संकेत माने या बुरा……पर क्या हम अपनी तरफ से उन्हें एक स्वस्थ बचपन नहीं देना चाहेंगे कहते है जब जागे तभी सवेरा,अभी अपने बच्चे के खिलौनों की टोकरी से सारे चाइनीज खिलौने निकाल फेकिए और कसम ले लें कि भविष्य में कभी किसी भी बच्चे को वे खिलौने खरीद कर ना देंगे जो आगे जाकर उसकी जिंदगी का सबसे बुरा खेल साबित हो,क्योंकि वे सिर्फ आपके या हमारे भविष्य नही इस देश के भविष्य है जिससे खेलने का हक ये धरती किसी को नही देगी ,तो हम आज से ही क्यों ना संभल जाएं,बताइए आप सब करेगे ना ऐसा….????????

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52 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 17, 2012

बहुत अद्भुत अहसास…सुन्दर प्रस्तुति… बहुत अद्भुत अहसास…सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी…….कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने……….बहुत खूब,बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये. मधुर भाव लिये भावुक करती रचना,,,,,,

pawansrivastava के द्वारा
April 14, 2012

बहुत हीं ज्ञान वर्धक आलेख ! मीनू जी आप ने मेरे ब्लॉग के लिए वक्त निकला ,उसे सराहा ,आपका शुक्रिया …मीनू जी ‘हाहाकार की कथा’ पढ़कर आपके मन को जो पीड़ा पहूँची है ,उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ …मैंने आपके चेहरे पे अजार का शिकन दिया है तो अब मेरा हीं दायित्व बनता है की आपके होठों पे मुस्कराहट लाऊँ ….इसी आशय से आपसे विनय करता हूँ की कृपया आप मेरी यह कविता पढ़ें -’बारिश से पहले ‘ मन को सुकून मिलेगा – http://pawansrivastava.jagranjunction.com/2012/03/31/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87/

Kumar Gaurav के द्वारा
April 10, 2012

मीनू जी सादर प्रणाम न जाने क्यों सरकार इन चाइनीज वस्तुओं की आपूर्ति को अपने देशी बाजार के मुकाबले बढ़ावा देती है? इसका दुष्प्रभाव हमारे देशी कारीगरों पर पड़ रहा है.

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 9, 2012

आदरणीय मीनू जी …… सादर प्रणाम ! आपने खिलौनों पर ही आधारित अपना यह लेख लिखा है तो मेरे मन में एक ग्रामीण खिलौने का ध्यान आ रहा है जोकि मेले में और किसी जी.टी. रोड पर लगी हुई खुली दूकान से भी मिल जाता है ….. लकड़ी के ट्रैक्टर या फिर कोई भी और लकड़ी का खिलौना ….. आपने मुंशी प्रेमचंद जी कि नायाब रचना “हामिद का चिमटा” तो पढ़ी ही होगी बस कुछ ऐसे ही खिलोने चाहिए बच्चों को …… हार्दिक आभार सहित :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

vikramjitsingh के द्वारा
April 9, 2012

अरे, काहे का बाज़ार सजा है, बहुत दिनों से देख रहे हैं, आप तो रास्ता ही भूल गए हमारे ब्लॉग का….. क्या सोच के बड़ी बहन बनी थीं आप…..हमारी? हमारा क्या है, हम तो आवारा बादल हैं बहना, कभी इस शहर तो कभी उस शहर……. मिलते रहेंगे आप से….घूमते-घामते …..

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 7, 2012

Aadrniy मीनू जी …. सादर प्रणाम ! आज आपके पास सिर्फ प्रणाम करने चला आया हूँ इसलिए रचना फिर बाद में कभी बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाये :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    minujha के द्वारा
    April 9, 2012

    मेरा आशीर्वाद सदैव आपके साथ है राजकमल जी बहुत बहुत धन्यवाद

sinsera के द्वारा
April 6, 2012

मीनू जी नमस्कार, बिलकुल सही बात है,सभी लोग जानते हैं पर निभाता कोई नहीं है. मैं आप से सहमत हूँ… live natural, be indian, buy indian…

    minujha के द्वारा
    April 6, 2012

    धन्यवाद सरिता जी यही बात दुखी करती है कि हम जानबूझ कर ये गलती बार बार दुहराते है,हम नही सुधरेंगे की तर्ज पर……..

naturecure के द्वारा
April 5, 2012

आदरणीय दीदी सादर अभिवादन ! कुछ कारणों से मै jj पर समय नहीं दे सका | उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार | अति संवेदनशील विषय उठाया है आपने अपने आलेख में ………….धन्यवाद !

    minujha के द्वारा
    April 6, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद कैलाश भाई आपने  अपना बहुमूल्य वक्त रचना को दिया आभार .

follyofawiseman के द्वारा
April 4, 2012

वैसे तो मैं मूलतः कवि नहीं हूँ, किन्तु जागरण जंक्शन के कुछ कवियों से प्रेरित हो कर कविता लिखने का प्रथम प्रयास कर रहा हूँ, कविता अगर पसंद आए तो खुले दिल से मेरी सराहना कीजिएगा ताकि मैं और भी ऐसी खूबसूरत कविताएँ लिखने के लिए प्रेरित हो सकूँ……….आपका Wise Man ! ऊपर आम का छतनार, नीचे हरे घास हज़ार, और वन-तुलसी की लताएँ करने गलबहियाँ तैयार, लेके चाकू और कटार, जब हो ओलो का प्रहार, बिमला मौसी का परिवार, चुने टोकरी मे अमियाँ फिर डाले उनका आचार… यह खेल चले दो तीन महीने लगातार…. फिर आए जाड़े का मौसम, पड़े शीत की मार, छोटू को हो जाए बुखार….. डॉक्टर की दवाई फिर करे छोटू का उद्धार….. फिर आए गर्मी की ललकार, सर्वत्र मचे हाहाकार, और जब लाइट न हो और हो पंखे की दरकार, मचाए सब चीख-पुकार, चले प्रक्रिया यह बारंबार, फिर आए बसंती बहार, इस मौसम के बारे में मैं कहूँगा अगली बार…… तब तक के लिए मेरा सादर नमस्कार…..

    minujha के द्वारा
    April 4, 2012

    आपका प्रयास बहुत अच्छा है ,आपको इसे स्वतंत्र ब्लॉग के रुप में कविता श्रेणी में भी प्रकाशित करना चाहिए था अच्छा लिखा है और आगे इससे और अच्छा करें ,ये दुआ  रहेगी उपरोक्त पोस्ट शायद आपको पसंद ना आई ,इसी कारण आपने उस बारे में कुछ नही कहा,खैर आप यहां आए इसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद .

Sumit के द्वारा
April 2, 2012

मगर चीन की मार्केट पे ऐसे हावी होने का कारन क्या है ????महगाई या हमारी असमर्थता ………… http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/04/02/उफ़-ये-हाई-सोसाइटी/

    minujha के द्वारा
    April 3, 2012

    सुमित जी बहुत दिनों बाद आपकी प्रतिक्रिया पाकर अच्छा लगा आपने सही कहा ,इन दोनों के अलावा एक और कारण है उनका तकनीकी रूप से बहुत ज्यादा विकसित होना हर वस्तु में उनकी नफासत भी हमें उनकी ओर खींच लेती है,एक बार फिर प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद

चन्दन राय के द्वारा
April 1, 2012

मीनू जी, जनहित का सन्देश देती हुई एक सुन्दर रचना

    minujha के द्वारा
    April 2, 2012

    हार्दिक धन्यवाद चंदन जी

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 31, 2012

संवेदनशील विषय पर एक संवेदनशील आलेख | बधाई !

    minujha के द्वारा
    April 1, 2012

    धन्यवाद आचार्य जी, आपके विचार पाकर बहुत अच्छा लगा,साभार.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 30, 2012

मीनू जी सुन्दर विषय और सार्थक लेख सीख देता और आगाह करता हुआ जनता और बच्चों का नुकसान कहाँ देखती है हमारी सरकार..पैसे जमा करने टैक्स जमा करने लूटने से फुर्सत मिले तब न /…निम्न सटीक इस कृत्रिम भ्रमजाल से निकलना ही होगा जो पल दो पल की खुशी की खातिर हमारा सबकुछ लील सकती है,क्योकि चीन निर्मित ये बाज़ार खिलौनो का नही हमारे मासुमों के छोटे छोटे दिलों का बाजार है जिससे वो इसलिए खेल रहे है जय श्री राधे भ्रमर ५

    minujha के द्वारा
    March 31, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद भ्रमर जी बहुत दिनों बाद आपकी प्रतिक्रिया पाकर खुशी हुई सहयोग बनाए रखें,आभार

March 29, 2012

आपने एक अति-महत्वपूर्ण विषय पर जो विचार प्रस्तुत किये हैं, वे अनमोल हैं. ये चाइनीज़ खिलौने वाकई बच्चों के लिए खतरनाक हैं. इतना ही नहीं, घरों में प्रयोग हो रही सस्ती ‘मेलामाइन’ की क्रोकरी भी ऐसे ही विषैले रसायनों से निर्मित होती है, और सौ बीमारियों की जड़ है. इससे लड़ पाने हेतु ये आवाज़ और, और, और बड़ी हो पानी चाहिए. आपके लिए बहुत साड़ी शुभकामनाएं, सादर.

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    यही तो सबसे बङे दुख की बात है टिम्सी जी कि हमें सब पता है पर हम अपने घरों में ये सारी चीजें इस्तेमाल कर रहे है,पहली शुरूआत तो अपने अपने घरों से ही होनी चाहिए,पर हम भारतीयों की एक आदत बङी निराली है हम लीक से हटकर कुछ करना पसंद नही करते,परिवर्तन हमें कुछ ज्यादा रास नही आता,जब तक कुछ दिखने वाली दुश्वारी नही हो जाती…..,खैर आपकी शुभकामनाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद 

nishamittal के द्वारा
March 28, 2012

हमारी नीतियों के कारण हावी होता चीनी आर्थिक साम्राज्यवाद सभी रूपों में पाऊँ पसार चूका है,परन्तु किसी के कानों पर जू नहीं रेंगती.अच्छा आलेख

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    बहुत बहुत आभार आपका कैसे रेंगेगी निशा जी सारा किया धरा तो उन्ही का है.

shashibhushan1959 के द्वारा
March 26, 2012

आदरणीय मीनू जी, सादर ! बहुत सार्थक रचना ! कितने खेद की बात है कि जिस बात से हम लोग यानी कि आम जनता चिंतित है, उससे हमारे माननीयों को कोई सरोकार ही नहीं है ! बहुत बहुत आभार ऐसी आवश्यक रचना के लिए !

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    शशि जी उन्हें चिंता तो तब होगी ना जब गद्दी छिनने की बात आएगी,अगर आम जनता से उनका सरोकार होता तो तस्वीर का रुख आज कुछ और होता हार्दिक धन्यवाद आपका ,आभार

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 26, 2012

मीनू जी नमस्कार, वास्तव में यह ध्यान देने योग्य है कि बाज़ार में हम क्या खरीद रहे हैं. कहीं हम अपने या अपनों के जीवन से ही घात तो नहीं कर रहे हैं. सार्थक और सन्देश देता हुआ, सराहनीय लेख

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    अजय जी बहुत बहुत धन्यवाद आपके समर्थन हेतु

yamunapathak के द्वारा
March 26, 2012

एक बहुत ही बेहतरीन विषय पर आपने ध्यान आकर्षित कराया अंतिम अनुच्छेद अत्यंत विचारणीय है.हम सभी अभिभावकों के लिए

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद यमुना जी आपकी प्रथम प्रतिक्रिया के लिए

yogi sarswat के द्वारा
March 26, 2012

आदरणीय मीनू जी नमस्कार ! चाइनीज सामान से भारत के बाज़ार अटे पड़े हैं जो निश्चित ही हमारे लिए आर्थिक रूप से भी खतरनाक है ! लेकिन वैश्वीकरण के दौर में इनसे सरकार को छुटकारा पाना मुश्किल है किन्तु हमें अपना विवेक बनाये रख कर हमें ही इस तरह के सामान से तौबा करनी होगी ! बढ़िया लेखन !

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    अपनी तरफ से हम इतना तो कर ही सकते है कि इनका प्रयोग यथासंभव बंद करने की कोशिश करें,आपका बहुत बहुत धन्यवाद योगी जी सोच को समर्थित करने के लिए

dineshaastik के द्वारा
March 26, 2012

मीनू जी प्रथम तो सार्थक संदेश देती हुई रचना के लिये बधाई….. यह सच है कि चाइनीज उत्पादों से बच्चों तथा बड़ों का स्वास्थ तो  खराब हो ही रहा है, हमारी अर्थ व्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ रहा है। यह चिन्तनीय एवं शर्मनाक है कि सरकार को इसकी कोई चिन्ता नहीं है। जैसे यह सरकार विदेशियों द्वारा थोपी गई सरकार हो। या इसका संचालन कोई विदेशी शक्ति कर रही हो। हम क्या कर सकते हैं। कुछ नहीं हमें तो केवल वोट डालने का सीमित अधिकार है। बाकी सारे अधिकार तो संसद में कैद किये है।  हमने पूछा सरकार से, हमारे हक क्या है। बोले बागी हो गया है, जेल में डाल दो।

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    इतनी सार्थक और जोशीली प्रतिक्रिया देकर विचारों को और मजबूत बनाने के लिए आपका आभार आस्तिक जी

vinitashukla के द्वारा
March 25, 2012

एक समसामयिक व विचारणीय मुद्दा उठाने के लिए धन्यवाद मीनू जी. अच्छे लेख पर बधाई.

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    शुक्रिया विनीता जी

March 25, 2012

सादर नमस्कार! सराहनीय और अर्थपूर्ण आलेख……अनुकरणीय…….हार्दिक आभार.

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद अलीन जी

akraktale के द्वारा
March 25, 2012

मीनू जी सादर नमस्कार, चायनीज खिलौनों की विशाल रेंज आज सारे बाजार पर भारी है.सरकार उदारीकरण की मजबूरी और मजबूत पडोसी से बैर से बचने की खातिर देश के बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है. किन्तु सभी अभिभावकों को समझना चाहिए कि जिन खिलौनों में विषैले रसायन हैं जो कि बच्चों कि सेहत के लिए ठीक नहीं उनको कभी ना खरीदें. आपने सरकार कि जिम्मेदारी लेकर अपने मंच से ये आवाज उठायी जिससे अवश्य ही कई लोग लाभान्वित होंगे. अभिनन्दन.

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    ये  भी बङे अफसोस की बात है रक्ताले जी कि इस उदारीकरण के पीछे भी हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री का ही हाथ था,आपने इतना सराहा बहुत बहुत आभार आपका

vikramjitsingh के द्वारा
March 25, 2012

प्रिय मीनू जी, सादर, हम आपसे सहमत हैं, जनहित का सन्देश देती हुई एक सुन्दर रचना………..

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    शुक्रिया विक्रम जी सहमति देने के लिए

omdikshit के द्वारा
March 25, 2012

मीनू जी, बहुत अच्छा विषय है,आप का.हम लोग तो विदेशी और सस्ता सामान ,की ही खोज करते हैं.उसके नुकसान की तरफ ध्यान दे,तो यह स्थिति ही न आये.

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद ओम जी सच कहा आपने

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
March 25, 2012

बहुत सुन्दर आलेख है मीनू जी.बिलकुल सच्चाई को बयां करता हुआ.मैंने इसी से सम्बन्धित एक पोस्ट लिखी थी ‘मेड इन चाईना’,दिसंबर के अंतिम सप्ताह में.हकीकत यही है कि बच्चों के खिलौनों से लेकर तमाम इलेक्ट्रोनिक उत्पाद एवं लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति तक चायनीज उत्पादों से बाजार अटे पड़े हैं. हमें इस बात पर ध्यान देना ही होगा कि जो खिलौने हम बच्चों को दे रहे हैं वह नुकसानदायक नहीं हो एवं अपने देश में निर्मित हो.

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद राजीव जी आपका ये आलेख अवश्य पढूंगी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 25, 2012

…पर क्या हम अपनी तरफ से उन्हें एक स्वस्थ बचपन नहीं देना चाहेंगे कहते है जब जागे तभी सवेरा,अभी अपने बच्चे के खिलौनों की टोकरी से सारे चाइनीज खिलौने निकाल फेकिए और कसम ले लें कि भविष्य में कभी किसी भी बच्चे को वे खिलौने खरीद कर ना देंगे जो आगे जाकर उसकी जिंदगी का सबसे बुरा खेल साबित हो,क्योंकि वे सिर्फ आपके या हमारे भविष्य नही इस देश के भविष्य है जिससे खेलने का हक ये धरती किसी को नही देगी ,तो हम आज से ही क्यों ना संभल जाएं,बताइए आप सब करेगे ना ऐसा….???????? समस्त से अनुरोध है कि इसका जनहित परिपालन करने और करने का कष्ट करें. स्नेही मीनू जी, सादर , शानदार सन्देश, बधाई.

    jlsingh के द्वारा
    March 25, 2012

    मैं तो यह ब्लॉग ही अपने सम्बंधित लोगों को मेल कर दे रहा हूँ. और अपने सगे संबधियों के बीच यह मैसेज जरूर पहुँचाऊँगा !

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    कुशवाहा जी आपका समर्थन सदैव बल देता है अपना स्नेह बनाए रखें

    minujha के द्वारा
    March 29, 2012

    मेरे विचारों को इतनी सार्थकता देने के लिए आपका  दिल से शुक्रिया जवाहर जी.


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