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क्योंकि वो पुरूष है....

Posted On: 4 Mar, 2012 Others में

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भव्य सजावट,जबरदस्त चकाचौंध,आदरयुक्त स्वागत सत्कार और लजीज व्यंजनों से भरी सुस्वादु आहार श्रृंखला -एक विवाहसमारोह का वर्णन कर रही हुं शायद आप सभी समझ रहैं होंगे और सोच रहें होंगे ऐसा तो हर शादी में होता है ,इसमें क्या खास है,,,,,,,,,.तो खास बस इतना है कि ये हमारे परिचित महोदय की दुसरी शादी थी.पर शौकिया नही मजबूरीवश की गई दुसरी शादी,पहली पत्नी पंद्रह दिन बाद मायका गई ,तो फिर से वहीं की होकर रह गई,बाद में कानुनी लङाई के बाद संबंध-विच्छेद तो हो गया ,पर पुरे वृतांत ने उन्हें इतना भयाक्रांत कर दिया कि विवाह नाम से ही बिदकने लगे,पर अंतत बुढी मां की बेबसी,समाजिक दवाब और आपने नर्म पङते तेवर ने उन्हें विवाह वेदी पर चढाकर ही दम लिया,सबने नवयुगल को यही दुआ दी कि उनकी जोङी बनी रहे,इनका तो घर बस गया,एक और महोदय है जिनकी विवाहिता ने उनका साथ सिर्फ इसलिए छोङ दिया क्योंकि वे अपनी माता से बहुत ज्यादा स्नेह रखते थे,उसने उल्टे उन्हें दहेज का मिथ्यारोप लगाकर सलाखों के पीछे तक पहुंचा दिया,परिचित चाहते तो मामला पैसों से निबट सकता था पर उनका आक्रोश उनकी बोली से झलकता है-धर्म तो चला गया धन नहीं जाने दुंगा….,खैर एक और घटना भी है,एक महाशय कोउनकी पत्नी विवाह के दूसरे दिन ही छोङ कर चली गई,कारण अन्यत्र प्रेम संबंध का होना था,पर उनसे जबरदस्त पैसे वसुले तब कही जाकर तालाक दिया ,अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उनके लिए रिश्ते आने बंद हो गए है,बेचारे पिताजी की इकलौते बेटे के विवाह की प्रतिक्षा करते करते आंख बंद हो गई,,और आज तक उनकी एक अदद सुशील पत्नी की तलाश जारी है………………..
उपर्युक्त सारी घटनाओं को आपसे बांटने का मेरा ध्येय बस एक है-“परित्यक्त” होने की बदनसीबी सिर्फ स्त्रियों का कलंक नही पुरूष भी बराबरी से इसके शिकार है,बस मुट्ठी भर लोगों की सहानुभूति उनके साथ होती है,ज्यादातर उनके विरुद्ध वाक तलवार लिए ही नजरआते है,कोई उस तन-मन-धन से जीर्ण-शीर्ण व्यक्ति के बारे में नही सोचता जिसका उसकी जिंदगी के सबसे खुबसूरत सपने ने दुस्वप्न का रूप ले उसके रातों की नींद उङा दी,जो कल तक परिवार का,समाज का,कार्यक्षेत्र का ,शान बना फिरता था,आज मुंह छिपाने तक का पुख्ता कारण नही उसके पास क्योकि वो पुरूष है?,कितनी बङी त्रासदी है एक ओर हम कहते है हमारा समाज पुरूष प्रधान है और निन्यानवे प्रतिशत कटघरे के पीछे खङे चेहरे पुरूषों के ही होते है,वही पुरूष जो एक बेटे,भाई,के रूप में बहुत अच्छा है पति बनते ही सबसे अत्याचारी बन जाता है,एक दुखियारी के दुख का सबसे बङा कारण बन बैठता है!…
मुझे लगता है विगत कुछ वर्षों से एक परंपरा सी चल पङी है –इस वर्ग को कोसने की,स्त्री अगर कही से मुद्दा है तो ठीकरा इसके सर ही फुटना है,क्या बेचारगी स्त्री या पुरूष देखकर आती है ?,किसी भी परिस्थिति के आकलन का आधार स्त्री या पुरूष नही…उसका असल कारण होना चाहिए..,बेचारा दोनों में से कोई भी हो सकता है तो दोषारोपण का नजरिया इकतरफा क्यों??,,,,,
स्त्रियों की प्रगति,उत्थान,बराबरी सब जायज है,पर उसे वो सब देने में किसी के अधिकारों का हनन ना हो ,इसपर भी तो नजर रखनी है.पुरूष आगे स्त्री पीछे-ये अब बीते जमाने की बात है तो जब पलङा बराबरी का है तो सहानुभूति का पायदान असंतुलित क्यों?…,क्यों उसकी बेचारगी अनदेखी हो जाती है?? क्यों उसे बिना सफाई का मौका दिए दोषी करार दिया जाता है???
मैं भी एक नारी हुं और अविवादित रूप से स्त्री के पक्ष में ही हुं,पर मेरी सहानुभूति पुरूषों के साथ भी बराबरी की है,क्योंकि में जानती हुं कि हर पुरष गलत नही होता,मै तो ये कहुंगी निन्यानवे फीसदी स्त्रियों की ही भांति संवेदनशील होते है,वे भी नैतिकता ,चरित्र,इज्जत,प्रेम और संबंध निर्वाहन में कुशल होते है,हां एक प्रतिशत अपवाद है तो ये भी हमें पता है कि अपवाद के बिना कोई सिद्धांत सत्यापित भी नही हो सकता,और जहां तक अच्छाई-बुराई की बात है तो क्या कोई ये दावा कर सकता है कि वो एक संपुर्ण इंसान है और उसमें सुधार की कोई गुंजाईश नहीं,फिर ये व्यर्थ की श्रेष्ठता की लङाई किस लिए ,अकेले ना तो नारी का गुजारा है ना पुरूष का,तो इस बार महिलादिवस पर मैं तो यही कहुंगी हर स्त्री से कि अपने सारे गिले शिकवों ,अपने सारे पुर्वाग्रहों को भुलाकर अपनी सोच को एक नई दिशा दें,दोषारोपण और चुहे-बिल्ली की लङाई छोङ कर,एक नया दृष्टिकोण दें अपने पुरक को,अपने हमसाये को,अपने साथी को,..उसकी मजबुती,उसकी ताकत,उसकी हिम्मत को अपना साथ देकर कठिन से कठिनतम बाधाओं को पार करें और दोनों के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करें और जिंदगी को आसान बना लें……….

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112 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

minujha के द्वारा
April 4, 2012

महोदय नमस्कार अभिवादन,पहिल बेर आपन ब्लॉग पर आपन भाषा म प्रतिक्रिया मिलल बड्ड हर्ष भेल,आहां क की कमी बूइझ परल आ कहां सुधारक गुंजाईश अछि  हमरा बिस्तार म कहब…..,सधन्यवाद..मीनू झा

follyofawiseman के द्वारा
April 3, 2012

मज़ा नई आयल……एहन बुझि पड़ैत अछि जे इ रचना कोनो पुरुष लिखने होईथ………

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 18, 2012

पुरुष के लिए ज़्यादा शर्मिंदगी और कलंक की बात है ,अच्छी कहानी बन पड़ी है | बधाई !!

    minujha के द्वारा
    March 20, 2012

    धन्यवाद आचार्य जी, आपने सराहा अच्छा लगा

March 14, 2012

एक उत्तम रचना को देरी से देख पाने हेतु क्षमाप्रार्थी हूँ. सबसे पहले, आपको ब्लॉगर ऑफ द वीक बन्ने की हार्दिक बधाई! जैसे की आपने विचार प्रस्तुत किये, उनसे पूरी तरह सहमत हूँ. मेरा भी ऐसा ही मानना है, की न तो पुरुषों को कोसना सही है, और न ही नारी को कोसना अथवा कमज़ोर दिखाना ही सही है. सच तो यही है, की बस कुछ लोग ही बुरे होते हैं, और उनके कारण बाकि सब भी बदनाम हो जाते हैं. वैचारिक संकीर्णता ही ऐसा व्यवहार का कारण है. एक बार फिर से, विचारपूर्ण प्रस्तुती पर बधाई स्वीकारें, सादर.

    minujha के द्वारा
    March 15, 2012

    धन्यवाद टिम्सी जी आपका समर्थन पाकर खुशी हुई,आपकी बधाई सहर्ष स्वीकार करती हुं

ashokkumardubey के द्वारा
March 13, 2012

मिनुजी आपने बहुत ही अच्छा चित्रण किया है पुरुष नारी संबंधों के विषय में क्यूंकि न तो कोई पुरुष पूर्णतया दोषी होता है और न औरत बस यह विचारो का मतभेद होता है और निस्संदेह विवाह एक निर्वाह करने का ही नाम है और पुरुष स्त्री दोनों का सामान रूप से कर्तव्य एवं अधिकारों का पालन ही समरसता एवं रिश्तों में सामजस्य लाने का काम करता है विवाह एक समझौता है जो इसे समझौते की तरह समझता है वहा विवाद जन्म नहीं लेता और किसी परिस्थिति बस अगर संबंधो में खटास या संदेह वाली बात आ जाये तो दोनों पक्छों को मिल बैठ कर विचार करना जरुरी होता ज्यादतर सम्बन्ध शक के बिना पर आज टूट रहे हैं और शक का इलाज हकीम लुकमान के पास भी नहीं था जो एक बहुत बड़े हकीम हुए थे यह कहावत शायद आपने भी सुनी होगी अंततः एक बढ़िया लेख आपने लिखा है आशा है महिलाएं एवं पुरुष इससे प्रेरणा ग्रहण करेंगे धन्यवाद .

    minujha के द्वारा
    March 14, 2012

    आदरणीय अशोक जी बहुत बहुत धन्यवाद,रचना का मर्म समझ आपने जो उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया दी,उसके लिए बहुत बहुत आभारी हुं आपकी,इसकी अपेक्षा आगे भी रहेगी,सादर धन्यवाद

Rachna Varma के द्वारा
March 12, 2012

सप्ताह की बेस्ट ब्लॉगर चुने जाने पर हार्दिक बधाइयाँ !

    SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
    March 12, 2012

    मीनू जी ,बेस्ट ब्लॉगर होने पर आपको बधाई .इस लेख द्वारा अपने पुरुषों की मानसिक स्थिति का सही आंकलन किया है ,आज महिला कम पुरुष अधिक शोषित हो रहे हैं ,दहेज़ कानून 498A ने तो अनेको इज्जतदार पुरुषों का जीवन ही बर्बाद कर दिया है .धन्यवाद ,एक प्रासंगिक मुद्दे को उठाने के लिए .

    minujha के द्वारा
    March 13, 2012

    रचना जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका

    minujha के द्वारा
    March 13, 2012

    सत्यशील जी नमस्कार आप ब्लॉग पर आए ये मेरे लिए बहुत बङी बात है आपकी सराहना और बधाई दोनो ह्रदय से स्वीकार करती हुं ,बहुत बहुत आभार आपका

Rakesh के द्वारा
March 12, 2012

माननीया मीनू जी सादर, सर्व प्रथामाप्को सप्ताह का बेस्ट ब्लागेर के लिए बधाई. जो मुद्दापने उठाया है, वह कटाई सराहनीय है, और मई भी इससे इत्तेफाक रखता हूँ, निम्न कविता तो मैंने अपनी बहन के ऊपर लिखी थी, किन्तु अभी पढता हूँ तो लगता है की काफी सम-सामयिक है: मै भी लड़ना चाहती हूँ! मुझे लड़ने दो! हार का मै स्वाद चखना चाहती हूँ. जीत का अभ्यास करना चाहती हूँ. प्रेयसी बन बन के हो गई हूँ बोर! मै नए किरदार बनना चाहती हूँ. मै भी जिम्मेदार बनना चाहती हूँ. धन्यवाद.

    minujha के द्वारा
    March 12, 2012

    आपकी बधाई और सराहना के लिए धन्यवाद राकेश जी  आपकी कविता नारी के जुझारूपन को दर्शाती है  यहॉ आकर आपने उन पंक्तियों को जोङा अच्छा लगा,पर राकेश जी क्षमा करेंगे मैं इसका आशय नही समझ पाई,अगर समझा  देते तो अच्छा होता,आपका फिर से एक बार धन्यवाद

Jeevan Jyoti के द्वारा
March 11, 2012

मीनू जी सबसे पहले बेस्ट ब्लॉगर के लिए आपको बधायी. आपका यह बैचारिक लेख उन पुरुषों के लिए तो जैसे रामायण और गीता की तरह लगेगा जो पुरुष स्त्रियों के सताए हुए हैं. लेकिन मेरी माने तो मुझे लगता है आपने हम पुरुषों पर नश्ल्भेद की टिपण्णी कर डाला है. हम पुरुष लोग कभी बेचारा नहीं थे और न हैं. पुरुष तो सिर्फ अपने स्त्रियों की इच्छा की पूर्ति के लिए बना है, उनकी ख़ुशी में अपना ख़ुशी देखते हैं. अब स्त्री बेवफा हो जाये और तरह-तरह का लांछन लगा कर पुरुषों को तंग करे तो इसमें पुरुष क्या करे. इतिहास गवाह है कि वही पुरुष ताजमहल बनाया तो सिर्फ अपने स्त्री के लिए, पहाड़ तोड़ कर रास्ता बनाया तो सिर्फ अपने स्त्री के लिए. फिर भी यदि स्त्री पराये मर्द के साथ भाग जाये तो इसमें मर्द बेचारा कैसे हो सकता है. बेचारी तो वह स्त्री है जो इतने चाहने वाले, प्रेम करने वाले पुरुष को छोड़ कर मौका परस्त हो तमाम झंझावातों में फंस जाती है……… मीनू जी यदि main आपके विचारों को ठेस पहुंचाया हो तो मुझे मांफ करेंगे …… सहृदय आभार.

    minujha के द्वारा
    March 12, 2012

    जीवन ज्योति जी नमस्कार सबसे पहले ब्लॉग पर आपका अभिनंदन आपकी आलोचनात्मक प्रतिक्रिया का मैं स्वागत करती हुं पर क्षमा याचना के साथ कहना चाहुंगी कि शायद आप आलेख के मर्म को समझ पाने में असमर्थ रहे है या मुझसे ही अपनी बात को रखने में कहीं चूक हो गई है,क्योंकि नस्लभेद पर टिप्पणी करना तो दूर मेरे जेहन में दूर दूर तक ऐसी कोई भावना कभी रही ही नही है अगर आलेख से आपको कुछ ऐसा लगा हो तो क्षमा करेंगे,पर अपनी इस बात पर अभी भी अडिग हुं कि बेचारा स्त्री-पुरूष में कोई भी,कभी भी हो सकता है,गल्ती दोनों में से किसी से भी हो सकती है,बस उसका आकलन निष्पक्ष होना चाहिए………,जहां तक रामायण और गीता की बात है तो जीवन जी,मैं अपने आप को उस लायक  भी नहीं समझती कि उन महान कृतियों के एक छंद का भी पार पा सकुं,बस छोटे मोटे प्रयास करने की कोशिश करती हुं,जिस पर आप सबकी सराहना और स्नेह पा सकुं,आपके आगमन और प्रतिक्रिया दोनों के लिए आपका बहुत धन्यवाद

omdikshit के द्वारा
March 11, 2012

मीनू जी, नमस्कार. बेस्ट ब्लोगर की हार्दिक बधाई. सचमुच ,सही पुरुषों की पीड़ा को आप ने लेखनी-बद्ध किया तो बहुत अच्छा लगा,क्योंकि आप महिला हैं.बधाई.

    minujha के द्वारा
    March 11, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ओम जी बस एक छोटा सा प्रयास था ,जिसे आप सब ने सराहा और स्नेह दिया,आभार आपका

vivek1959 के द्वारा
March 11, 2012

वैचारिक आलेख हेतु बधाई

    minujha के द्वारा
    March 11, 2012

    धन्यवाद विवेक जी

Santosh Kumar के द्वारा
March 10, 2012

आदरणीया मीनू जी ,.सादर नमस्कार पहले बहुत ही सार्थक पोस्ट पर आपका अभिनन्दन करता हूँ ,..फिर सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ ब्लोगर होने की बढ़ाई देता हूँ ,..आखिर में देर से आने के लिए क्षमा चाहता हूँ ,… वाकई पीड़ित पुरुषों की पीड़ा कम लोग समझ पाते हैं ,…बहुत बहुत बधाई 

    minujha के द्वारा
    March 11, 2012

    संतोष जी एक लंबे अरसे बाद ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया पाकर बहुत खुशी हुई,आपकी सारी बधाईयां दिल से स्वीकार करती हुं,साथ ही एक अनुरोध भी करना चाहुंगी,कि रचना में त्रुटि दिखे तो अवगत कराएं,आप लोगों से हमेशा मार्गदर्शन की अपेक्षा रहती है,कुछ गलत कहा हो  तो क्षमा चाहुंगी, साभार धन्यवाद

Amita Srivastava के द्वारा
March 10, 2012

मीनू जी ब्लोगर ऑफ़ दा वीक की हार्दिक बधाई

    minujha के द्वारा
    March 11, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद अमिता जी

    minujha के द्वारा
    March 11, 2012

    धन्यवाद चंदन जी

बनारसी बाबू के द्वारा
March 10, 2012

आदरणीया मीनू जी, आपने एक बहुत ही सार्थक एवं अनछुए विषय को सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया है| इसके लिए आपका ब्लॉगर ऑफ़ द वीक बनना स्वागत योग्य है| बधाई आपको| सादर,

    minujha के द्वारा
    March 11, 2012

    आपका धन्यवाद बनारसी जी,बधाई और उत्साहवर्धन दोनो के  लिए

tejwanig के द्वारा
March 9, 2012

बहुत अच्छी रचना है, आपको ढेर सारी बधाइयां

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    तेजवानी जी,आप ब्लॉग पर आए,बधाई दी अच्छा लगा,आभार आपका

mparveen के द्वारा
March 9, 2012

मीनू जी बेस्ट ब्लोगर ऑफ़ दी वीक बनने की आपको बहुत सी बधाइयाँ ….

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    आपकी बधाई दिल से स्वीकार्य है प्रवीन जी,आभार

jagobhaijago के द्वारा
March 9, 2012

आदरणीया मीनूजी, होली की शुभकामनाओं के साथ सप्ताह का सर्वोत्तम ब्लागर चयनित होने पर बधाई… आपने अपने लेख में बिल्कुल ठीक लिखा है कि…किसी भी परिस्थिति के आकलन का आधार स्त्री या पुरूष नही…उसका असल कारण होना चाहिए..,बेचारा दोनों में से कोई भी हो सकता है…। वैसे भी देश काल परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सम्यक विवेचनोपरान्त ही ऐसे  संवेदनशील मामलों में किसी को भला बुरा समझना या कहना चाहिए।  अच्छा लेख….आपसे सहमत…

    sadhana thakur के द्वारा
    March 9, 2012

    मीनू ,हार्दिक बधाई ,बेहद ख़ुशी हुई तुम्हे ब्लोगर ऑफ़ द वीक देखकर .मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है ……….

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    March 9, 2012

    बहुत सुन्दर आलेख मीनू जी.बिलकुल कटु सत्य का वर्णन किया है.कुछ दिनों की आपाधापी में पता नहीं कैसे यह आलेख पढ़ने से चूक गया था.आज बधाई देने के किये ब्लॉग पर आया तो नजर पड़ी.जे.जे.के मुखपृष्ठ पर भी आलेख नजर नहीं आया था.बहरहाल,’Best Blogger of the week ” के लिए बधाई.

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    प्रणाम आपसे बस फिर से वही बात कहना चाहुंगी कि वर्णमाला के ज्ञान से यहां तक का सफर,सारा श्रेय बस आपका है,आपके आशीर्वाद की जरूरत हमेशा रहेगी,और मेरे पास कहने को कुछ भी नही….

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    जागो भाई आपने ब्लॉग पर आकर सराहा,सहमति दी बहुत बहुत शुक्रिया

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    राजीव जी आपके विचारों की प्रतिक्षा थी,आपकी प्रतिक्रिया और बधाई दोनो के लिए बहुत धन्यवाद आपका

shashibhushan1959 के द्वारा
March 9, 2012

आदरणीय मीनू जी, सादर ! सप्ताह की सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान मिलने पर मेरी हार्दिक बधाई !!! होली की डबल …… ट्रिपल ……… शुभकामनाएं !!!

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    धन्यवाद शशि जी,हार्दिक धन्यवाद

sinsera के द्वारा
March 9, 2012

मीनू जी नमस्कार, बधाई, होली मुबारक…. महिला दिवस पर महिलाओं की हैट्रिक की भी बधाई… सज्जन पुरुषों की स्त्रियों द्वारा की जाने वाली दुर्दशा का आप ने अच्छा वर्णन किया है, अभी कुछ दिनों पहले “इंडिया टुडे “में भी ऐसा ही आर्टिकिल छपा था.ये बिलकुल सच बात है की कुछ स्त्रियाँ , पुरुषों की सिधाई का नाजायज़ फायदा उठती हैं.कुछ हफ़्तों पहले श्रीमान सत्यशील अग्रवाल जी “नारी ही नारी की दुश्मन “लिख कर ब्लॉगर ऑफ़ द वीक बने, जिसमें उन्हों ने लिखा की शाइनी आहूजा की पत्नी ने नौकरानी की पीड़ा को न समझते हुए उसके खिलाफ गवाही दी. मैं ने उन से पूछा की जब बलात्कार जैसे गंभीर आरोप पर एक पत्नी अपने पति का साथ दे रही है तो अवश्य ये नौकरानी की चाल है,यहाँ स्त्री (नौकरानी )शोषित नही बल्कि स्वार्थी है.. मेरे कमेन्ट का उन्हों ने आज तक उत्तर नही दिया .. आप ने आज स्त्री के अनुचित व्यवहार के लिए आवाज़ उठा कर बहुत निर्भीक पहल की है..साधुवाद..

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    सरिता जी नमस्कार कहां थीं आप,बधाई तो बनती ही है,आखिर महिला दिवस का अवसर है,सच कहा आपने हम अपना ही राग लेकर बैठ जाते है क्या पुरूष क्या स्त्री-पहले हम दोषी का तो पता कर लें,स्त्री का स्त्री होना ही तो उसकी बेगुनाही का आधार नही,आपकी बधाई और बङाई दोनों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद

मनु (tosi) के द्वारा
March 9, 2012

मीनू जी बहुत-बहुत मुबारक हो आपको ये सप्ताह की क्वीन का ताज़

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद मनु जी,

March 9, 2012

सादर नमस्कार! Congratulation to be the best blogger of the week!

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

     आपका धन्यवाद अलीन जी

dineshaastik के द्वारा
March 9, 2012

मीनू जी नमस्कार, ब्लॉगर ऑफ दा वीक बनने की बधाई

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    आस्तिक जी,हार्दिक धन्यवाद आपका

alkargupta1 के द्वारा
March 9, 2012

मीनू जी , सार्थक ,विचारणीय व उत्कृष्ट आलेख पढ़ कर अति प्रसन्नता हुई…… सप्ताह की सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान मिलने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें !

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

     प्रतिक्रिया और बधाई दोनों के लिए आपका हार्दिक आभार

jlsingh के द्वारा
March 9, 2012

मीनू जी,सादर अभिवादन! अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन बेस्ट ब्लागर ऑफ़ द वीक चुने जाने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें….

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    धन्यवाद जवाहर जी मै तो बस यही कहुंगी ,ये आप सबों के स्नेह और सहयोग से ही संभव हो पाया,बहुत बहुत धन्यवाद

Kumar Gaurav के द्वारा
March 8, 2012

सादर प्रणाम मीनू जी बड़ी निष्पक्षता और बेबाकी से लिखा गया ब्लॉग, बेस्ट ब्लॉग का सच्चा अधिकारी है. हम आज भी उसी ज़माने में जी रहे हैं जब महिलाओं को अबला और न जाने क्या-क्या कहा जाता था. आज जमाना बदल चुका है. किसी भी जुल्म को अब महिला-पुरुष जैसे चश्मे से देखना बंद करके उसे न्याय की दृष्टि से देखने की जरुरत है. महिला दिवस की बधाई.

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    धन्यवाद गौरव जी आप ब्लॉग पर आए,सकारात्मक प्रतिक्रिया दी बधाईयां दीं,सबके लिए बहुत बहुत धन्यवाद

vikramjitsingh के द्वारा
March 8, 2012

मीनू जी, सादर, बेस्ट ब्लागर ऑफ़ द वीक चुने जाने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें….

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    विक्रमजीत जी नमस्कार चलिए बधाई देने के लिए ही सही आप ब्लॉक पर पधारे तो..,आपकी बधाई स्वीकार  है,व सहयोग भी अपेक्षित है

jalaluddinkhan के द्वारा
March 8, 2012

बेस्ट ब्लागर ऑफ़ द वीक चुने जाने पर मेरी हार्दिक बधाई.

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    आपका हार्दिक धन्यवाद जलालुद्दीन जी

vinitashukla के द्वारा
March 8, 2012

बहुत बहुत बधाई मीनू जी, बेस्ट ब्लॉगर बनने के लिए. होली की शुभकामनायें.

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद विनीता जी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 8, 2012

स्नेही मीनू जी , मेरे द्वारा की गई पहिली मार्किंग ने ही आपको दीवार पर टांग दिया था. मेरे कमेंट्स देखे, बहुत बहुत बधाई. शुभ होली .

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी आप सबों के शुभाशीष का ही ये प्रतिफल है,इसको  यूंहि बनाए रखिएगा,आभार सहित धन्यवाद

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 8, 2012

एक “महिला” ने था वेग से बोला, ठंडा पर गया सब का शोला, पुरुष की चिंता को दर्शाया, सर्वश्रेष्ट रचना को बनाया, इसीलिए ये ख्याति पायी, नयी विचारों को है लायी, मैं भी अब होके नतमस्तक, ये ही गीत सुनाता हूँ, अजर रहे तू अमर रहे, ये प्राथना ही अब गाता हूँ” मीनू दीदी को सर्वश्रेष्ट रचनाकार मिलने के लिए ………………..तहे दिल से बधाई………….. जे जे वालों ने महिलाओं से सेटिंग की है लगता है………….अलका जी, सरिता जी……………और अब आप……………..ये तो हेट्रिक लग गयी……………महिला दिवस पर पुरषों को जोरदार सबक ………..धन्यवाद

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    आनंद भाई आपका भी तहेदिल से शुक्रिया ये आप सब का प्यार है जो मुझे यहां तक ले आया और मै इस मंच की भी ह्रदय से शुक्रगुजार हुं कि इन्होने मुझे इस सम्मान का हकदार समझा.एक बार फिर जागरण जंक्शन सहित आप सभी ब्लॉगर बंधुओं को मेरा हार्दिक धन्यवाद व आभार

jalaluddinkhan के द्वारा
March 6, 2012

अच्छे और बुरे लोग हर जगह हैं,हर वर्ग में हैं,ज़रूरत है अच्छे लोगों को समर्थन और सहयोग देने की.कानून भी पुरुषों के खिलाफ है,जिसमे सुधार होना चाहिए ताकि कानून का दुरूपयोग न हो.यह लेख एक अच्छी सोच के साथ सामाजिक सरोकार का दायित्व निभाने की सराहनीय कोशिश है.बधाई स्वीकारें.

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    जलाल जी नमस्कार ब्लॉग पर स्वागत आपका सोच को समर्थित कर मजबुत बनाने के लिए शुक्रिया

chaatak के द्वारा
March 6, 2012

”आज मुंह छिपाने तक का पुख्ता कारण नही उसके पास क्योकि वो पुरूष है?” सार्थक और आँखें खोलने वाल लेख| काफी दिनों बाद इस विषय पर पूर्वाग्रह से मुक्त लेखन मंच पर देखकर बहुत ख़ुशी हुई| अच्छे लेखन पर हार्दिक बधाई!

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    धन्यवाद चातक जी आप सबों की सराहना बल देती है,आभार

anamika7577 के द्वारा
March 6, 2012

मीनू जी इसमें कोई दो राय नहीं की एक अच्छी सोच का प्रदर्शन कर आपने पुरुष समाज की वह वाही तो लूटी ही है साथ में एक छुपे हुए सच को भी दर्शाया है. मीनू जी आपने जो कहा – निन्यानवे फीसदी स्त्रियों की ही भांति संवेदनशील होते है,वे भी नैतिकता ,चरित्र,इज्जत,प्रेम और संबंध निर्वाहन में कुशल होते है,हां एक प्रतिशत अपवाद है…लेकिन मैं इस वक्तव्य में आपसे सहमती नहीं रखती. अगर ऐसा होता तो पुरुष प्रधान समाज का दर्जा ऐसे ही नहीं मिल गया इस पुरुष को हमारे समाज में. मानती हूँ आज स्त्रियाँ अपने स्वार्थ के लिए साम,दाम, दंड,भेद वाली नीति अपनाती है….लेकिन किस से सीखी हैं?…इन्ही पुरुषों से और सब से बड़ी बात ऐसी नीतियां अधिकतर पढ़ी-लिखी शहरी स्त्रियाँ अपनाती हैं….गाँवों में जा कर देखिये….कैसे गुज़र बसर करती हैं….मारें खाती हैं….और बच्चों की खातिर शराबी पतियों के साथ निर्वाह करती हैं. आज शहरों में स्त्री के रहन-सहन के मायने बदल रहे हैं. कुछ हद तक आपके साथ सहमत हो कर भी असहमत हूँ…क्यूंकि अंततः हमारा देश ग्रामीण प्रधान देश है जहाँ नारियों की शिक्षा निम्न है जिसके साथ साथ सोच भी पुराणी है.

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    अनामिका जी नमस्कार ब्लॉग पर स्वागत यकीन मानिए मेरा उद्देश्य वाहवाही लूटने का कदापि नही था जिन घटनाओं का मैने हवाला दिया है ,उनकी पीङा देखी है मैने और महसुस किया है कि पुरूषों के प्रति ये धारणा पाल लेना कि वो गलत है ,बेहद ही एकतरफा सोच है,आप से सहमत हुं पुरूष भी गलत होते है पर क्या सभी एक जैसे होते है,क्या नारी गलत नही होती…. प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

chandanrai के द्वारा
March 6, 2012

आपने गंभीर मुद्दा बड़ी कुशलता से उठाया है. एक मार्मिक घटना के द्वारा आपने अत्यंत सटीक धारदार लेख लिखा है

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    धन्यवाद चंदन जी, प्रथम प्रतिक्रिया के लिए और सराहने के लिए भी

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 6, 2012

मीनू जी नमस्कार…. सत्य है कि हर पुरुष गलत नहीं होता. पुरुषों का भी शोषण होता है लेकिन जो माथे पर कलंक लग गया है उसका क्या………

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    इसी दुखद मानसिकता ने लिखने को प्रेरित किया अजय जी प्रतिक्रिया के बहुत धन्यवाद आपका

akraktale के द्वारा
March 5, 2012

मीनू जी सादर नमस्कार, समाज में कई तरह के चेहरे मौजूद हैं, कुछ कम हैं जिन्हें हम अपवाद कहते हैं.पुरुष के बेचारा होने की परिस्थितियाँ भी कम देखने को मिलती हैं.भले प्रकरण कम हों पर मुद्दा संवेदनशील है.भौतिकतावाद में रुपयों को ही अहम् मानने वाले ऐसी ओछी हरकतें करते हैं उन्हें क्वचित भी चिंता इस बात की नहीं रहती की उनका जो आत्मसम्मान पति के घर रह गया क्या चाँद रुपयों से उसे प्राप्त किया जा सकता है. आपने गंभीर मुद्दा बड़ी कुशलता से उठाया है. अवश्य ही चिंतनीय है. साधुवाद.

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    अच्छी बात कही आपने रक्ताले जी धन लोलुपता ही नहीं बल्कि इस परिस्थिति के लिए दिन प्रतिदिन हमारी गिरती मानसिकता भी दोषी है,जहॉ विवाह जैसे पुनीत संस्कार को भी हमने गुड्डे-गुङियों का खेल बना दिया है,प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार आपका

    akraktale के द्वारा
    March 8, 2012

    मीनू जी, अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस, होली एवं सप्ताह के श्रेष्ठ ब्लोगर होने पर आपको ढेरों बधाइयां शुभकामनाएं.

    minujha के द्वारा
    March 9, 2012

    रक्ताले जी नमस्कार मुझे याद है जब मैने ब्लॉगिंग की शुरूआत की थी,अपना पहला आलेख पोस्ट किया था,तो सबसे पहली प्रतिक्रिया आप ही की आई थी,और आज इस सम्मान प्राप्त करने के बाद भी पहली बधाई आप से ही मिली,क्या कहुं मेरे पास शब्द नही,बस मेरा, दिल से धन्यवाद आपको

munish के द्वारा
March 5, 2012

आदरणीय मीनू जी, समाज में हर तरह के लोग मौजूद हैं लेकिन ये भी सच है की ज्यादातर पुरुषों को ही कटघरे में खड़ा किया जाता है निर्दोष होते हुए भी……. ! ये सब व्यक्तिगत विचारधारा पर निर्भर है और माहिलायें भी इस तरह के झूठे प्रकरणों में फंसाई जाती हैं …….! खैर इस विषय पर मेरा हास्य लेख पढियेगा ” पुरुषों सावधान ” आपको और आपके परिवार को होली की शुभकामनाएं http://munish.jagranjunction.com/2011/03/19/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%8F%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%80-holi-contest/

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    आपका कहना शत प्रतिशत सही है मुनीष जी मैं तो बस ये कहना चाह रही थी कि पुरूषों के हिस्से सहानुभूति कम जलालत ज्यादा आती है प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ,आपकी रचना समय मिलते ही पढूंगी

Jayprakash Mishra के द्वारा
March 5, 2012

मीनू जी अच्छी रचना.

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    धन्यवाद जयप्रकाश जी

yogi sarswat के द्वारा
March 5, 2012

आदरणीय मीनू जी , नमस्कार ! आपने समझने की कोशिश की है की पुरुष भी प्रतारित हो सकते हैं पर शायद उनके लिए कोई सक्षम न तो क़ानून है न ही सामाजिक सहानुभूति. कोई महिला या पत्नी पुरुष पर इल्जाम लगाये तो तुरंत लोग बिश्वास कर लेंगे और पर अगर पुरुष चिल्लाएगा तो कहेंगे – देखो नाटक कर रहा है. पत्नी पति के प्रति वफादार हो तो उसे पतिव्रता आदि महान संबोधनों से विभूषित किया जायेगा वही अगर पुरुष पत्नीधर्म का पालन करे तो उसे जोडू का गुलाम कहा जायेगा. लेकिन आपको बधाई देना चाहूँगा की आपने आखिर में पुरुषों की नाराज़गी से खुद को बचा लिया है ! बहुत खूब लिखा है आपने !

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    योगी जी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार

    yogi sarswat के द्वारा
    March 12, 2012

    मीनू जी , होली की वजह से मैं संपर्क में नहीं था ! आज देखा तो आप मिले , ब्लॉगर ऑफ़ डी वीक के रूप में ! बहुत बहुत बधाई ! देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ ! बहुत बहुत मुबारकवाद !

    minujha के द्वारा
    March 12, 2012

    योगी जी नमस्कार आपसे बधाई प्राप्त होनी ही है,इसके लिए आश्वस्त थी बहुत बहुत धन्यवाद,यूंहि सहयोग बनाए रखें

jlsingh के द्वारा
March 5, 2012

आदरणीय मीनु जी, सादर अभिवादन! आप एक महान नारी जिसने पुरुषों के प्रति सहानुभूति की नजरिया रखती हैं. वरना यहाँ तो…. आपने समझने की कोशिश की है की पुरुष भी प्रतारित हो सकते हैं पर शायद उनके लिए कोई सक्षम न तो क़ानून है न ही सामाजिक सहानुभूति. कोई महिला या पत्नी पुरुष पर इल्जाम लगाये तो तुरंत लोग बिश्वास कर लेंगे और पर अगर पुरुष चिल्लाएगा तो कहेंगे – देखो नाटक कर रहा है. पत्नी पति के प्रति वफादार हो तो उसे पतिव्रता आदि महान संबोधनों से विभूषित किया जायेगा वही अगर पुरुष पत्नीधर्म का पालन करे तो उसे जोडू का गुलाम कहा जायेगा. अगर कुछ ज्यादा लिख गया हूँ तो विद्वतजन माफ़ करें, यह सोचकर की होली में बहक गया हूँ! आप सबको होली मुबारक!

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    आप आदरणीय है आपकी बात भला बुरी कैसे लग सकती है,मैने भी पुरूषों से जुङे पुर्वाग्रहों की ही चर्चा की है,आपने प्रतिक्रिया दे समर्थन जताया आपका हार्दिक धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
March 4, 2012

आदरणीया मीनू जी सादर नमस्कार, मार्मिक, भाव प्रधान एवं हृदय को आन्दोलित कर देने वाली रचना निश्चित ही सराहनीय है।

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    आस्तिक जी,आपका बहुत बहुत धन्यवाद

vinitashukla के द्वारा
March 4, 2012

सुंदर एवं सार्थक लेख. एक अनदेखी व उपेक्षित व्यथा को सामने लाने के लिए बधाई मीनू जी.

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    आपने सराहा आभार आपका.

sadhana thakur के द्वारा
March 4, 2012

एक अच्छी सोच को दर्शाया है मीनू ,पीड़ित तो पुरुष भी होतें ही हैं ….बहुत अच्छा लेख …………

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    ये तीनों घटनाएं यही की है,और आप यकीन करेंगी तीनो लङके हर तरह से योग्य है,पर नियति पर किसका बस है,आपकी प्रशंसा मेरे उत्साह को दुगना कर देती है,बहुत बहुत धन्यवाद

March 4, 2012

सादर नमस्कार! पुरुष वेदना को व्यक्त करता लेख …..प्रशंसनीय .

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    धन्यवाद अलीन जी

krishnashri के द्वारा
March 4, 2012

महोदया , बहुत ही संतुलित विश्लेषण , दोनों रथ के दो पहिये हैं , दोनों का महत्व बराबर का है , किसी को कमतर कहने पर गाडी नहीं चलेगी .होली की हार्दिक शुभकामना .

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    सच कहा आपने,दोनो का महत्व बराबर का है आपकी प्रतिक्रिया पाकर हर्ष हुआ,आभार आपका

March 4, 2012

मीनू जी नमस्कार ! पुरुष वेदना एवं पुरुष पीड़ा को समझते हुए एक स्त्री का सहानुभूतिपूर्ण विश्लेषण अच्छा लगा….दोनों सुखी रहे, दोनों विकास करें और दोनों साथ साथ रहें ॥इससे बड़ा सुख मानव जीवन मे क्या हो सकता है। आपको कोटि कोटि बधाई इस सुंदर प्रस्तुति के लिए !!!

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    सूर्या जी,यही अभिलाषा हर स्त्री-पुरूष के लिए मेरी भी है क्योंकि दोनों का जीवन अगले के बिना निरर्थक है,प्रतिक्रिया के लिए आभार आपका 

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 4, 2012

आदरणीय मीनू दीदी, प्रणाम बहोत ही सार्थक लेख आपका …………. समाज का ये भी एक अतु सत्य चेहरा है जो आप दिखा रही है……… आज कुछ लड़की वाले सिर्फ अपने निजी हितों के लिए ………लडको और उनके पुरे परिवार को दोहरी केस में फ़सान दे रहें है जो की बहोत गलत है……………………..आपको पुरे परिवार को होली मुबारक

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    आनंद जी हर तस्वीर के दो पहलु  होते है,कलुषिक पक्ष में ये सारी बातें है,जो बिल्कुल गलत है बहुत बहुत धन्यवाद आपका 

shashibhushan1959 के द्वारा
March 4, 2012

आदरणीय मीनू जी, सादर ! बहुत न्यायिक एवं संतुलित विश्लेषण ! वरना तो इस विषय पर प्रतिक्रया देना भी कठिन होता है ! बहुत बहुत आभार !

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    शशि जी मुझे भी लगा था कि मेरे द्वारा उठाए गए इस मुद्दे को स्त्रियों का कम ही समर्थन मिलेगा,पुरी तो नही कहुंगी पर बहुत हद तक मेरी ये धारणा गलत सिद्ध नही हुई आप वापस आए ,आपसे प्रतिक्रिया प्राप्त कर खुशी हुई आभार

nishamittal के द्वारा
March 4, 2012

आपके विचार से सहमत हूँ ऐसा प्राय होता है,एक स्वस्थ साधन की आद में स्वार्थ सिद्धि

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    आप सही कह रही है निशा जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका

mparveen के द्वारा
March 4, 2012

मीनू जी नमस्कार, बहुत सही समीक्षा की आपने …. होली की आपको व् आपके परिवार को बहुत बहुत शुभकामनायें !!!!

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    आपको आलेख सटीक लगा आपका बहुत बहुत धन्यवाद प्रवीन जी

मनु (tosi) के द्वारा
March 4, 2012

मीनू जी अच्छा लेख …. बधाई स्वीकारें

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    धन्यवाद मनु जी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 4, 2012

स्नेही मीनू जी . शुभाशीष यथार्थ संतुलित चित्रण, अच्छी समीक्षा. सराहनीय. उत्क्रष्ट. ऐसा ही लिखना चाहिए. होली की शुभ कामनाये, सपरिवार. कुशवाहा एवं परिवार की ओर से .

    minujha के द्वारा
    March 6, 2012

    धन्यवाद कुशवाहा जी,आपका मार्गदर्शन भी हमेशा मिलता रहना चाहिए,ह्रदय से आभार आपका


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